टोपी NCERT Solutions Class 8 Hindi Vasant Part 3 Chapter 18 with Answers

टोपी NCERT Solutions Class 8 Hindi Vasant Part 3 Chapter 18 with Answers

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NCERT/CBSE Solutions Class 8 Hindi

Page No: 124

प्रश्न अभ्यास

कहानी से

Q1. गवरइया और गवरा के बीच किस बात पर बहस हुई और गवरइया को अपनी इच्छा पूरी करने का अवसर कैसे मिला?

Answer: गवरइया और गवरा के बीच आदमी के कपड़े पहनने को लेकर बहस हुई। गवरइया को आदमी द्वारा रंग-बिरंगे कपड़े पहनना अच्छा लग रहा था जबकि गवरा का कहना था कि कपड़ा पहन लेने के बाद आदमी और बदसूरत लगने लगता है। उसका यह भी कहना था कि कपड़े पहन लेने के बाद आदमी की कुदरती ख़ूबसूरती ढँक जाती है।

Q2. गवरइया और गवरे की बहस के तर्को को एकत्र करें और उन्हें संवाद के रूप में लिखें।

Answer: गवरइया और गवरे की बहस निम्नलिखित चार तर्कों पर हुई –

  1. आदमियों द्वारा कपड़े पहनने पर।
  2. गवरइया द्वारा टोपी पहनने पर।
  3. रुई का फाहा मिलने पर।
  4. गवरइया द्वारा टोपी पहनने के बाद।

इनके बीच हुई बहस को संवाद के रूप में इस प्रकार लिखा जा सकता है

  1. आदमियों द्वारा कपड़े पहनने पर
    गवरइया – देखते हो, आदमी रंग बिंरगे कपड़े पहनकर कितना सुंदर दिखाई देता है।
    गवरा – पागल हो रही है क्या? आदमी कपड़े पहनकर बदसूरत दिखता है।
    गवरइया – लगता है आज लटजीरा चुग आए हो क्या? आदमी पर कपड़ा कितना फबता है?
    गवरा – खाक फबता है। कपड़े से मनुष्य की खूबसूरती ढक जाती है। अब तुम्हारे शरीर का एक-एक कटाव मैं जो देख रहा हूँ, कपड़े पहनने पर कैसे देख पाता।
    गवरइया – पर आदमी मौसम की मार से भी बचने के लिए कपड़े पहनता
    गवरा – कपड़े पहनने से आदमी की सहनशक्ति भी तो प्रभावित होती है। कपड़े पहनने से आदमी की हैसियत में भी तो फर्क दिखने लगता है। इसके अलावा उनकी हैसियत का भी पता चल जाता है।
  2. गवरइया द्वारा टोपी पहनने पर
    गवरइया – आदमी की टोपी तो सबसे अच्छी होती है। मेरा भी मन टोपी पहनने को करता है।
    गवरी – तू टोपी की बात कर रही है। टोपी की तो बहुत मुसीबतें हैं। कितने राज-पाट बदल जाते हैं। लोग अपनी टोपी बचाने के लिए कितनों को टोपी पहनाते हैं। जरा-सी चूक हुई और टोपी उछलते देर नहीं लगती है। मेरी मान तो तू इस चक्कर में पड़ ही मत।
  3. रुई का फाहा मिलने पर
    गवरइया – मिल गया, मिल गया! मुझे रुई का फाहा मिल गया।
    गवरा – लगता है तू पगला गई है। रुई से टोपी बनवाने का सफर कितना कठिन है।
    गवरइया – टोपी तो बनवानी है चाहे जैसे भी बने।
  4. गवरड्या द्वारा टोपी पहने के बाद
    गवरइया – (गवरे से) देख मेरी टोपी सबसे निराली… पाँच हुँदने वाली।
    गवरा – वाकई तू तो रानी लग रही है।
    गवरइया – ‘‘रानी नहीं, राजा कहो मेरे राजा। अब कौन राजा मेरा मुकाबला करेगा।”

Q3. टोपी बनवाने के लिए गवरइया किस किस के पास गई ? टोपी बनने तक के एक-एक कार्य लिखें।

Answer: टोपी बनवाने के लिए गवरइया निम्नलिखित चार लोगों के पास गई –

  • धुनिया के पास – घूरे पर मिला रुई का फाहा लेकर गवरइया सबसे पहले धुनिए के पास गई। वह पहले तो गवरइया का काम करने को तैयार न था पर आधी रुई मेहनताने के रूप में पाने पर काम करने के लिए तैयार हो गया और रुई धुन दी।
  • कोरी के पास – धुनिया से रुई धुनवाकर गवरइया सूत कतवाने धुनिए के पास गई। कोरी ने पहले तो मुफ्त में काम करने से मना कर दिया पर आधा सूत मेहनताना के रूप में पाने पर महीन सूत कात दिया।
  • बुनकर के पास – कोरी द्वारा काता महीन सूत लेकर गवरइया बुनकर के पास गई। बुनकर ने आधे कपड़े को पारिश्रमिक के रूप में लेकर महीन कपड़ा बुन दिया।
  • दर्जी के पास – पहले तो दर्जी गवरइया का काम करने को तैयार न था, परंतु जब गवरइया ने उससे कहा कि दो टोपियाँ सिलकर एक उसे दे दे तथा एक स्वयं ले ले तब वह सहर्ष काम करने को तैयार हो गया।

Q4. गवरइया की टोपी पर दर्जी ने पाँच फुँदने क्यों जड़ दिए?

Answer: जब गवरइया ने दर्जी को यह कहा कि वह उस कपड़े की दो टोपियाँ सिल ले। एक टोपी मजूरी के रूप में अपने लिए रख ले। इस प्रकार के पारिश्रमिक से खुश होकर दर्जी ने गवरइया की टोपी पर पाँच फुँदने भी जड़ दिए।

कहानी से आगे

Q1. किसी कारीगर से बातचीत कीजिए और परिश्रम का उचित मूल्य नहीं मिलने पर उसकी प्रतिक्रिया क्या होगी? ज्ञात कीजिए और लिखिए।

Answer: मैंने एक दरी बनाने वाले से बातचीत की। उसे सत्तर रुपये रोज़ मज़दूरी के रूप में मिलते हैं। उसकी बनाई दरी पर मालिक को एक सौ सत्तर रुपये का लाभ होता है। वहाँ पर दस मज़दूर काम करते हैं। मालिक एक दिन में एक हजार रुपये का लाभ प्राप्त कर लेता है और दस-दस घंटे काम करने वाले मज़दूर को रोटी का जुगाड़ करना भी भारी पड़ता है। इस बात को लेकर दरी बुनने वाले तनाव और दुख से घिरे रहते हैं। जाएँ भी तो कहाँ जाएँ? सब जगह इसी प्रकार शोषण होता है।

Q2. गवरइया की इच्छा पूर्ति का क्रम घूरे पर रुई के मिल जाने से प्रारंभ होता है। उसके बाद वह क्रमशः एक-एक कर कई कारीगरों के पास जाती है और उसकी टोपी तैयार होती है। आप भी अपनी कोई इच्छा चुन लीजिए। उसकी पूर्ति के लिए योजना और कार्य-विवरण तैयार कीजिए।

Answer: मैंने परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया। मुझे उपहार स्वरूप 501 रुपये तथा सभी विषयों की किताबें एवं सी.डी. मिली। अब समस्या थी कि इस सी.डी. को मैं कहाँ देखें। घर में सी.डी. प्लेयर नहीं था। मैंने माँ से कुछ रुपये माँगे तथा कुछ पिताजी से। मैंने अपनी और भाई की गुल्लक से पैसे निकाले । एक मित्र से भी दो सौ रुपये लिए। अब मेरे पास कुल दो हजार दो सौ रुपये थे। मैं अपने पिताजी को पुस्तकें दिलाने के बहाने साथ ले गया और किताब की दुकान पर न जाकर इलैक्ट्रानिक्स की दुकान से सी.डी. प्लेयर दो हजार तीन सौ रुपये में खरीदा। एक सौ रुपये पिताजी ने दे दिए। इस प्रकार अपनी आवश्यक वस्तु पाकर मैं बहुत खुश हुआ।

Q3. गवरइया के स्वभाव से यह प्रमाणित होता है कि कार्य की सफलता के लिए उत्साह आवश्यक है। सफलता के लिए उत्साह की आवश्यकता क्यों पड़ती है, तर्क सहित लिखिए।

Answer: किसी भी कार्य को पूरा करने के लिए मन में उत्साह होना आवश्यक है। उत्साह से ही हमारे मन में किसी भी कार्य के प्रति जागरूकता उत्पन्न होती है। यदि हम किसी भी कार्य को बेमन से करेंगे तो निश्चय ही हमें उस कार्य में सफलता नहीं मिलेगी। कोई न कोई कमी ज़रूर रह जाएगी।

अनुमान और कल्पना

Q1. टोपी पहनकर गवरइया राजा को दिखाने क्यों पहुँची जबकि उसकी बहस गवरा से हुई और वह गवरा के मुँह से अपनी बड़ाई सुन चुकी थी। लेकिन राजा से उसकी कोई बहस हुई ही नहीं थी। फिर भी वह राजा को चुनौती देने को पहुँची। कारण का अनुमान लगाइए।

Answer: अपनी सुंदर सी टोपी पहन गवरइया ने गवरे को दिखाया। गवरे ने उसकी प्रशंसा की किंतु गवरइया टोपी दिखाने राजा के पास गई वह राजा को यह अहसास करवाना चाहती थी कि राजा ! तू प्रजा को बिना पारिश्रमिक दिए काम करवाता है। प्रजा को राजा के अलावा किसी का सहारा नहीं होता। यदि इन्हें उचित पारिश्रमिक न मिला तो ये लोग भूखों मर जाएँगे। गवरइया राजा की कार्यप्रणाली को भली प्रकार समझ चुकी थी। उसने धुनिए, कोरी एवं दर्जी को काम करते हुए यह सब प्रत्यक्ष देख लिया था कि वे राजा के काम को स्वेच्छा से नहीं बल्कि डर से कर रहे हैं, जबकि पारिश्रमिक पाने पर यही काम अच्छी तरह से करते हैं। इसके अलावा पारिश्रमिक देने पर काम जल्दी भी होता है। गवरइया राजा को यही सब एहसास करवाने एवं चुनौती देने गई थी।

Q2. यदि राजा के राज्य के सभी कारीगर अपने-अपने श्रम का उचित मूल्य प्राप्त कर रहे होते तब गवरइया के साथ उन कारीगरों का व्यवहार कैसा होता?

Answer: यदि राजा के राज्य के सभी कारीगर अपने-अपने श्रम का उचित मूल्य प्राप्त कर रहे होते तो शायद वे गवरइया से पारिश्रमिक की चाह ही न रखते। खुशी-खुशी मुफ्त में ही उसकी टोपी बना देते।

Q3. चारों कारीगर राजा के लिए काम कर रहे थे। एक रजाई बना रहा था। दूसरा अचकन के लिए सूत कात रहा था। तीसरा बागी बुन रहा था। चौथा राजा की सातवीं रानी की दसवीं संतान के लिए झब्बे सिल रहा था। उन चारों ने राजा का काम रोककर गवरइया का काम क्यों किया?

Answer: राजा श्रम का मूल्य दिये बिना काम करा रहा था। सभी काम करने वाले खीझकर ही काम कर रहे थे। गवरइया ने उनसे आधी मज़दूरी देने का वचन दिया। इसीलिए धुनिया, कोरी, बनुकर और दर्जी ने अपने हाथ का राजा का काम छोड़कर गवरइया का काम किया। वे अपनी उचित मज़दूरी पाकर गवरइया का काम करने को तैयार हो गए।

भाषा की बात

Q1. गाँव की बोली में कई शब्दों का उच्चारण अलग होता है। उनकी वर्तनी भी बदल जाती है; जैसे – गवरइया, गौरैया का ग्रामीण उच्चारण है। उच्चारण के अनुसार इस शब्द की वर्तनी लिखी गई है। पूँदना, फुलगेंदा का बदला हुआ रूप है। कहानी में अनेक शब्द हैं जो ग्रामीण उच्चारण में लिखे गए हैं, जैसेमुलुक-मुल्क, खमी-क्षमा, मजूरी-मजदूरी, मल्लार-मल्हार इत्यादि। आप क्षेत्रीय या गाँव की बोली में उपयोग होने वाले कुछ ऐसे शब्दों को खोजिए और उनका मूल रूप लिखिए, जैसे-टेम-टाइम, टेसन/स्टेशन।

Answer: क्षेत्रीय या गाँव की बोली में उपयोग होने वाली कुछ शब्द तथा उनके मूल रू

Q2. मुहावरों के प्रयोग से भाषा आकर्षक बनती है। मुहावरे वाक्य के अंग होकर प्रयुक्त होते हैं। इनका अक्षरश: अर्थ नहीं बल्कि लाक्षणिक अर्थ लिया जाता है। पाठ में अनेक मुहावरे आए हैं। टोपी को लेकर तीन मुहावरे हैं; जैसेकितनों को टोपी पहनानी पड़ती है। शेष मुहावरों को खोजिए और उनका अर्थ ज्ञात करने का प्रयास कीजिए।

Answer: (1) टोपी उछालना :- (इज़्ज़त उछालना) एक गलत काम करने से आदमी की टोपी उछलते देर नहीं लगती।
(2) टोपी से ढ़ँक लेना :- (इज्ज़त ढ़क लेना) अपने घर की बात को टोपी से ढ़ँक लेना ही अच्छा है।

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